मैं कुछ कर रहा था, तभी किसी ने बताया की ‘वो’ आई है. मेरा दिल जोर से धड़कने लगा, उसका सामना करने के लिए शायद मैं तैयार नहीं था, पर मिलने का इंतज़ार भी था बरसों से. पल भर में वो सारी यादें आँखों के सामने थी. कैसी होगी वो? क्या वो भी मुझसे मिलने के लिए उतावली होगी?

दिल की तेज़ धडकनों के साथ मैं कमरे में गया, वो सोफे पर बैठी थी उसकी नज़रें खिड़की के बाहर निहार रही थी, शायद वो भी पुरानीं यादों में खोयी हुई थी. मुझे देखते ही वो झटके से उठ खडी हुई.

मैं उसे एकटक निहारता ही रह गया. बिलकुल वैसी ही थी. थोड़ी मोटी हो गयी थी और चेहरा थोडा सा भरा भरा स हो गया था. वो भी मुझे एकटक निहारती रही. जैसे उसके मन में भी ऐसा ही कुछ चल रहा था. उसके कपड़ो पर मैं ध्यान नहीं दे पाया. पहले जैसे तो नहीं थे, पर शायद उम्र का असर होगा. मेरी आँखें नाम होने लगी, तो मैं बहाने से खिड़की की तरफ देखने लगा. हम दोनों बैठ गए.

“कैसी हो?” मैंने पूछा.
“ठीक हूँ.” उसने जवाब दिया.

मैं कुछ और भी सुनना चाहता था पर उसने और कुछ नहीं कहा. शायद वो मेरे सवालों का इंतज़ार कर रही थी, शायद ये जानने के लिए कि क्या मैं उसके बारे में कुछ जानना भी चाहता हूँ या नहीं.

“अपनी ज़िन्दगी से खुश हो?”, मैंने अगला सवाल पूछा.
“हाँ.” इतना ही कहाँ उसने. फिर थोड़े सन्नाटे के बाद उसने पूछा - “तुम कैसे हो?”.

“मैं भी खुश हूँ, शायद उतना नहीं... पर... हूँ.” मैं और भी कुछ बोलते बोलते रह गया. कितना बदल जाता है सब कुछ समय के साथ. पहले हमारे बीच में कोई शिष्टाचार नहीं था. पर अब ना जाने क्यूँ…?

फिर मैंने उसके बारे में और जानने के लिए पूछा - “परिवार कैसा है, बच्चे?”.

“चार हैं... १ लड़की ३ लड़के.” उसने कुछ झेपते हुए जवाब दिया. मेरी आँखें खुली रह गयी, आज के ज़माने में चार बच्चे! “सबका स्कूल ही चल रहा है. उन्ही के साथ मेरा समय बीत जाता है...”.

“मेरे साथ रहती तो शायद १ या २ ही होते... ” मैं थोडा हँसते हुए बोला. “मेरी याद आती थी कभी?”

“कभी कभी… ” उसने कहा. “पर जीवन जीने के लिए यादों से काम नहीं चलता. मेरे पति बड़े अच्छे है, मेरा बहुत ख्याल रखते हैं. मैं भी पूरी कोशिश करती हूँ, कि अपना फ़र्ज़ निभाऊ. तुम अपने बारे में भी कुछ बताओ ना?”

मैं कुछ बोलने ही वाला था की अचानक अलार्म की आवाज़ सुनाई दी, फ़ोन चेक किया तो पता चला सवेरा हो गया है. मैं उठ के खड़ा हो गया, चारों तरफ नज़रें दौड़ाई पर वो कहीं नहीं थी. सिर्फ मैं और तेज़ शोर करता हुआ मेरा फ़ोन अलार्म.

अपने अतीत के साथ, मेरी मुलाकात अधूरी रह गयी थी. काश थोडा और देर उसके साथ रह पाता.

सपने कभी पूरे क्यूँ नहीं होते…

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