Showing Posts By: Rajendra   View All

Author: Rajendra

Member Since: Feb 18, 2018, 7:42 AM

Unfollow Rajendra   Followers: 1

Author Stats

Posts: 64
Post Views: 7289
Post Recommended: 6

Shorts: 20
Shorts Views: 1
Shorts Likes: 2



Today I came across a news item related to the price hike in the JNU mess charges. I do not know when they were revised before this, but the prices itself are at extreme low side, even after the...

Read More...

लोग सच कहते हैं - औरतें बेहद अजीब होतीं है रात भर पूरा सोती नहीं थोड़ा थोड़ा जागती रहतीं है नींद की स्याही में उंगलियां डुबो कर दिन की बही लिखतीं टटोलती रहतीं है दरवाजों की...

Read More...

मैं कुछ कर रहा था, तभी किसी ने बताया की ‘वो’ आई है. मेरा दिल जोर से धड़कने लगा, उसका सामना करने के लिए शायद मैं तैयार नहीं था, पर मिलने का इंतज़ार भी था बरसों से. पल भर में वो सारी यादें आँखों के...

Read More...

हनीमून .. कल तुझे सैर करवाएंगे समन्दर से लगी गोल सड़क की रात को हार सा लगता है समन्दर के गले में ! घोड़ा गाडी पे बहुत दूर तलक सैर करेंगे धोडों की टापों से लगता है कि कुछ देर के राजा है हम...

Read More...

यही सिलसिला चलेगा । देखना तुम । दिन रात बारिश होगी । दीवालें सीलने लगेगीं । सीने पर बैठा बाज और भारी होता जाएगा । बैसाख में जला पठार, अपनी ही भस्म में अँखुआ रहा । हर जानने वाले के घर घुटी...

Read More...

जिंदगी के सफ़र में चलते चलते हर मुकाम पर यही सवाल परेशान करता रहा.... कुछ रह तो नहीं गया? 3 महीने के बच्चे को दाई के पास रखकर जॉब पर जानेवाली माँ को दाई ने पूछा... कुछ रह तो नहीं गया? पर्स,...

Read More...

पिछले हफ्ते अरसो बाद अपना गाँव देखा। सोचा था पूरा बदल गया होगा मगर पाया वही बचपन का गाँव कुछ नए जेवर पहने। उन यादों के एकहिस्से को ग़ज़ल में समेटने की कोशिश - यहां लोगों का मिट्टी से रिश्ता बाकी...

Read More...

इक बात होंठों तक है जो आई नहीं, बस आँखों से है झांकती, तुमसे कभी, मुझसे कभी, कुछ लफ्ज़ है वो मांगती, जिनको पहेन के होंठों तक आ जाए वो, आवाज़ की बाहों में बाहें डाल के इठलाये वो. लेकिन जो ये इक...

Read More...

मैं रोज़गार के सिलसिले में, कभी कभी उसके शहर जाता हूँ तो गुज़रता हूँ उस गली से| वो नीम तारीक सी गली और उसी के नुक्कड़ पे ऊँघता सा पुराना खम्बा उसी के नीचे तमाम शब इंतज़ार करके मैं छोड़...

Read More...

वो फिर से मेरे बगल से गुजर गयी… आज वो खाली थी. शायद मेरे ही जैसे किसी का इंतज़ार था उसे. मेरे मन ने भी आवाज़ दी - रुक जा दो मिनट बैठ जा. पर दिमाग ने समझाया नहीं अभी नहीं, अभी बहुत काम है. फिर कभी...

Read More...

Every morning when I drive to school to drop my son, I feel really sorry for the parents who do not follow traffic rules in front of the school get. They are there to drop their kids, who will...

Read More...

जब भी मैं अपने ८ साल के बेटे को हिंदी शब्दों का मतलब पूछते पाता हूँ, तो कहीं न कहीं ये सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि क्या हम इंग्लैंड के निवासी हैं या फिर भारत के. अंग्रेज़ी का इतना असर हमारे ऊपर...

Read More...