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Recently I found the website ZamIndia.com. It is a new website and there are limited number of products as of now. But the website looks good and products are of good quality. At present there are...

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सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो, अब गोविंद ना आएंगेछोड़ो मेहंदी खड़ग संभालोखुद ही अपना चीर बचा लो द्यूत बिछाए बैठे शकुनि, ... मस्तक सब बिक जाएंगे सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आएंगे | कब...

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पिछले हफ्ते मेरे दाँत में दर्द हुआ और मैं जिंदगी में पहली बार दाँतों के डॉक्टर के पास गया।रिसेप्शन में बैठे-बैठे मेरी नजर वहाँ दीवार पर लगी नेमप्लेट पर पड़ी और उस पर लिखे डॉक्टर के नाम को पढ़ते ही...

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रावण में अहंकार था तो पश्चाताप भी था रावण में वासना थी तो संयम भी था रावण में सीता के अपहरण की ताकत थी तो बिना सहमति परस्त्री को स्पर्श भी न करने का संकल्प भी था सीता जीवित मिली ये राम...

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This is the third part of my Jaipur visit blogs. You can read the first two parts by visiting the below links one by one.Road Trip Delhi to JaipurStay in Jaipur and Visit to Amber Fort PalaceOn day...

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As you may know by now, I live in Indirapuram. I have my own accommodation since 2010. I bought a builder flat at that time due to shortage of funds. Recently, I have been looking for options to...

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Since last few years there are many ride sharing services started in Delhi/NCR. They offer cheap shared rides for travelling to nearby locations. Like many others I am using this service since 4...

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*पहली चौपाई :*बाहर निकल भ्रमण जिन कीन्हां।खाकी-गण दारुन दु:ख दीन्हां।।लम्ब डण्ड से होत ठुकाई।करहु नियंत्रण मन पर भाई।।लॉक डाउन रहहु गृह माहीं।भ्रमण फिज़ूल करहु तुम नाहीं।।*दूसरी चौपाई :*सत्य सखा तव...

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मैं रथ का टूटा हुआ पहिया हूँ लेकिन मुझे फेंको मत ! क्या जाने कब इस दुरूह चक्रव्यूह में अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआ कोई दुस्साहसी अभिमन्यु आकर घिर जाय ! अपने पक्ष को असत्य जानते...

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इक बात होंठों तक है जो आई नहीं, बस आँखों से है झांकती, तुमसे कभी, मुझसे कभी, कुछ लफ्ज़ है वो मांगती, जिनको पहेन के होंठों तक आ जाए वो, आवाज़ की बाहों में बाहें डाल के इठलाये वो. लेकिन जो ये इक...

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हनीमून .. कल तुझे सैर करवाएंगे समन्दर से लगी गोल सड़क की रात को हार सा लगता है समन्दर के गले में ! घोड़ा गाडी पे बहुत दूर तलक सैर करेंगे धोडों की टापों से लगता है कि कुछ देर के राजा है हम...

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जी तो बहुत चाहता है इस कैद-ए-जान से निकल जाएँ हम तुम्हारी याद भी लेकिन इसी मलबे में रहती है अमीरी रेशम-ओ-कमख्वाब में नंगी नज़र आई गरीबी शान से एक टाट के परदे में रहती है मैं इंसान हूँ बहक जाना मेरी...

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